उन्होंने 1985 में इतिहास से स्नातकोत्तर की डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त की और बाद में समाज विज्ञान मे एमफ़िल क़ी उपाधि 2004 में पंजाब विश्वविद्यालय से प्राप्त की। उनके एमफ़िल शोध का विषय था ' नशे की लत की स्थिति में पुनर्वास के लिए प्रशिक्षण की प्रभावोत्पादकता'।
1987 में सिविल सेवा परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद उन्होने अपने करियर की शुरूआत सूचना और प्रसारण मंत्रालय में पत्र सूचना कार्यालय,से की। मार्च 1992 उन्होंने दृश्य एवं प्रचार निदेशालय (डी.ए.वी.पी.) में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के राष्ट्रीय प्रचार अभियानोंतथ शिक्षा एवं संचार रणनीति का दायित्व संभाला।
जुलाई 1995 से नवंबर 1999 के बीच उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में विशेष कार्याधिकारी (ओ.एस.ड़ी.) क़े रूप में सूचना मीडिया नीतियों के निर्माण तथा क्रियान्वयन में सक्रिय योगदान किया। इसके साथ ही उन्होंने यूनीसेफ के बाल-अधिकारों से संबंधित मास्टर प्लान तथा यूनेस्को के विकास एवं संचार कार्यक्रमों को लागू करने में योगदान दिया। इसी पद पर रहते हुए उन्होंने गुट निरपेक्ष तथा सार्क राष्ट्रों के सूचना मंत्रियों, राज्यों के सूचना मंत्रियों के सम्मेलन के आयोजन में सहयोग किया और राष्ट्रीय मीडिया नीति पर एक वर्किंग पेपर बनाने में भी शामिल हुए।
नवंबर 1999 में उन्होंने सामाजिक न्याय तथा अधिकारिता मंत्रालय में उप-सचिव का पदभार ग्रहण किया। इस पद पर उनके पास मादक द्रव्य दुरूपयोग नियंत्रण नीति तथा कार्यक्रम, मीडिया प्रबंधन तथा प्रशासन का कार्यभार था। अगस्त 19, 2004 को उन्होंने निदेशक, राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान का पदभार ग्रहण किया।
भारत सरकार में विभिन्न पदों पर काम करत हुए श्री सत्येंद्र प्रकाश ने कई प्रोजेक्टों का सफल क्रियान्वयन किया जिसमें मादक द्रव्य दुरूपयोग निषेध, एच.आई.वी.एड्स, बाल-अधिकार आदि से संबंधित प्रोजेक्ट शामिलथे। उन्होंने काठमांडू में आयोजित यूनीसेफ के बाल अधिकारों पर आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन, एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए यू एन-ई एस सी ए पी द्वारा वृद्धावस्था पर आयोजित मनीला सम्मेलन, मादक दवाओं के कमीशन की अंतर्राष्ट्रीय बैठक (विएना) आदि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। इन मंचों पर श्री सत्येंद्र प्रकाश ने बाल अधिकार तथा मीडिया, वृद्धावस्था पर राष्ट्रीय आलेख तथा मादक द्रव्य दुरूपयोग निषेध-एक राष्ट्रीय दृष्टिकोण जैसे विषयों पर आलेख प्रस्तुत किए। जनसंख्या नियंत्रण तथा प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पर इनकी प्रदर्शनी को 1994 में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ तथा इसी विषय पर इनके रेडियो कार्यक्रम को 1992 में आर ए पी ए पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। |