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राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान की स्थापना अनेक केंद्रीय समितियों की अनुशंसा के आधार पर 1961 ई में गृह-मंत्रालय के अंतर्गत सुधार सेवाओं के केंद्रीय ब्यूरो के रूप में हुई थी। सन 1964 में इसे सामाजिक सुरक्षा विभाग के अंतर्गत स्थानांतरित कर दिया गया। सन 1975 से यह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के एक अधीनस्थ कार्यालय के रूप में काम कर रहा है । भारत सरकार द्वारा 15 जुलाई 2002 को जारी अधिसूचना संख्या १०-३/२०००-एस डी अंक २ के अनुसार अब यह एक स्वायत्त निकाय है तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 1860 के सोसायटीज एक्ट XXI के तहत निबंधित है।
यह संस्थान
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार की केंद्रीय परार्मशदात्री संस्था है।
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सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में शोध और प्रशिक्षण के लिए एक विशिष्ट केंद्र है। |
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प्रांतीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सरकार तथा गैर-सरकारी संस्थाओं के बीच सामंजस्य तथा तालमेल सुनिश्चित करता है। |
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सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में निरोधात्मक, पुनर्वास संबंधी और आरोग्यकर साधनों, कार्यक्रमों और नीतियों को विकसित करती है। |
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शोध, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, परामर्श, संपर्क-सूत्रों के विकास, प्रलेखन और प्रकाशन संबंधी कार्यो में संलग्न है। |
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निर्धारित कर्तव्य
सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में नीतियों और कार्यक्रमों के निर्माण के लिए आवश्यक सहयोग एवं इनसे संबंधित कार्यक्रमों को सशक्त बनाने के लिए भारत सरकार को आवश्यक तकनीकी सहयोग प्रदान करना राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान के निधारित कर्तव्य हैं। इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रासंगिक आंकड़े इक्ट्ठा करना। इन आंकड़ों को व्यवस्थित स्वरूप देकर डेटाबेस तैयार करना, शोध-निष्कर्षों, सर्वोत्तम-आचरणो, सफलता के उदाहरणों आदि का दस्तावेजीकरण् किया जाता हैं।
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